7માં પગાર પંચનો 10 વર્ષનો કાર્યકાળ પૂરો થયો, આ 7 ફેરફારોની પગાર-પેન્શન પર સૌથી વધુ અસર થયેલી

7th Pay Commission Ends: 31 दिसंबर के साथ 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को पूरे 10 साल हो चुके हैं। यह अवधि करीब 1.2 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए काफी अहम रही, क्योंकि इसी दौरान उनकी सैलरी, भत्ते और रिटायरमेंट से जुड़े फायदे तय होते रहे। अब जब यह दौर पूरा हो चुका है, तो सभी यह समझना चाहते हैं कि पिछले एक दशक में क्या बदला और आगे 8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीद की जा सकती है।

जनवरी 2016 से लागू हुआ था 7वां वेतन आयोग

7वां वेतन आयोग जनवरी 2016 में लागू किया गया था और इसके बाद अगले दस वर्षों तक इसी के आधार पर वेतन ढांचा चलता रहा। इस आयोग ने न सिर्फ सैलरी बढ़ाई, बल्कि भत्तों, पेंशन और दूसरी सुविधाओं में भी बड़े बदलाव किए।

बेसिक सैलरी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

इस वेतन आयोग का सबसे बड़ा असर बेसिक पे पर देखने को मिला। लेवल-1 के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई, यानी करीब 157 प्रतिशत की बढ़ोतरी। वहीं सबसे ऊंचे लेवल-18 पर यह वेतन 90,000 रुपये से बढ़कर लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच गया। यह बदलाव मुख्य रूप से 2.57 के फिटमेंट फैक्टर की वजह से संभव हुआ।

महंगाई भत्ता शून्य से 58 प्रतिशत तक पहुंचा

शुरुआत में 7वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता शून्य रखा गया था। धीरे-धीरे महंगाई बढ़ने के साथ इसमें बढ़ोतरी होती गई और दस साल बाद यह 58 प्रतिशत तक पहुंच गया। हाल ही में की गई 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी इस आयोग के तहत आखिरी DA वृद्धि मानी जा रही है।

2.57 फिटमेंट फैक्टर क्यों बना सबसे अहम

7वें वेतन आयोग में सबसे ज्यादा चर्चा 2.57 फिटमेंट फैक्टर को लेकर हुई थी। इसी फैक्टर से पुरानी बेसिक सैलरी को नई पे मैट्रिक्स में बदला गया। आसान भाषा में कहें तो पुरानी बेसिक सैलरी को 2.57 से गुणा करके नई सैलरी तय की गई। इसी एक फैसले ने सभी लेवल पर वेतन और पेंशन को सीधे तौर पर प्रभावित किया।

भत्तों में बड़ा बदलाव और असर

इस आयोग ने सिर्फ बेसिक पे ही नहीं बढ़ाई, बल्कि हाउस रेंट अलाउंस, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और कई अन्य भत्तों की भी समीक्षा की गई। कुछ भत्ते नए जोड़े गए, कुछ में बदलाव किया गया और कुछ पर सीमा तय की गई। इसके चलते कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी उनकी पोस्टिंग, शहर और विभाग के हिसाब से अलग-अलग होने लगी।

ग्रेच्युटी की टैक्स-फ्री सीमा बढ़ी

जब महंगाई भत्ता बेसिक पे के 50 प्रतिशत तक पहुंचा, तब सरकार ने टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी की सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी। यह बदलाव 1 जनवरी 2024 से लागू हुआ और इससे रिटायर होने वाले कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिला।

यूनिफाइड पेंशन स्कीम की शुरुआत

केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेंशन स्कीम शुरू की। यह नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए एक नया विकल्प बना। इस स्कीम में पुरानी पेंशन और NPS दोनों की खूबियों को जोड़ा गया है, जिसमें महंगाई के अनुसार समायोजित न्यूनतम मासिक पेंशन की गारंटी दी जाती है।

NPS में सरकार का योगदान बढ़ा

7वें वेतन आयोग के बाद सरकार ने NPS में अपना योगदान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही कर्मचारियों को निवेश विकल्प चुनने की ज्यादा आजादी मिली और टैक्स लाभ भी बढ़ाए गए, जिससे यह स्कीम ज्यादा आकर्षक बनी।

अब नजरें 8वें वेतन आयोग पर

अब जब 7वें वेतन आयोग का दौर पूरा हो चुका है, तो सभी की नजरें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं। नए आयोग को रिपोर्ट तैयार करने में करीब 18 महीने लग सकते हैं और उसे लागू होने में भी समय लगेगा। पिछली परंपरा को देखें तो कई बार कर्मचारियों को पिछली तारीख से भी लाभ दिए गए हैं। ऐसे में आने वाले साल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए काफी अहम साबित हो सकते हैं।

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